मुंगेली/नगर पालिका परिषद मुंगेली में पिछले कुछ दिनों से जारी राजनीतिक गतिरोध अंततः समाप्त हो गया है। पी.आई.सी. सदस्य कांग्रेस पार्षदों ने न केवल अपने इस्तीफे का खंडन किया है,बल्कि अध्यक्ष के नेतृत्व पर अटूट विश्वास भी जताया है। इस पूरे घटनाक्रम पर विराम लगाते हुए नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
क्या था पूरा मामला?
बीते दिनों कतिपय कारणों और आपसी सामंजस्य की कमी के चलते इन पार्षदों ने पी.आई.सी. सदस्य पद से हटने के लिए पत्र दिया था। इस कदम के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। हालांकि,अब कांग्रेस के 4 पार्षदों ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि वे अपने पदों पर बने रहना चाहते हैं और पूर्व में दिए गए त्यागपत्र को वापस लेते हैं।
पार्षदों ने पत्र में क्या कहा?
कांग्रेस पार्षद,अजय साहू (पार्षद, कबीर वार्ड),रामकिशोर देवांगन,(मो. बशीर खान,वार्ड) प्रतिमा रवि कोशले (पार्षद,राजेंद्र वार्ड) और दिलीप सोनी (पार्षद, विनोबाभावे वार्ड) ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी के नाम सौंपे पत्र में स्पष्ट किया कि वे परिषद की मजबूती के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में दिए गए त्यागपत्र का अब कोई औचित्य नहीं है और वे अध्यक्ष रोहित शुक्ला द्वारा लिए जाने वाले आगामी सभी निर्णयों का पूर्ण समर्थन करेंगे।
इस्तीफों के खंडन और कांग्रेस पार्षदों के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने कहा:
“नगर पालिका परिषद एक परिवार की तरह है। कामकाज के दौरान वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है,लेकिन हमारा उद्देश्य मुंगेली का समुचित विकास है। पार्षदों ने जो पत्र दिया है वह उनके बड़प्पन और शहर के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है। हम सभी अध्यक्ष और पार्षद अब नई ऊर्जा के साथ मुंगेली की जनता की समस्याओं को सुलझाने और और शासन द्वारा स्वीकृत किए गए विकास कार्यों से शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। हमलोगों द्वारा लिए जाने वाले हर फैसले में परिषद की सहमति और जनहित सर्वोपरि रहेगा।”
परिषद की मजबूती पर मुहर
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अध्यक्ष के इस संतुलित बयान और पार्षदों के स्टीफें की वापसी से मुंगेली नगर पालिका परिषद और अधिक मजबूत होकर उभरा है। इस्तीफे वापसी के इस कदम से विपक्ष के उन दावों को भी झटका लगा है,जो परिषद में फूट की चर्चा कर रहे थे।











