मुंगेली/जिले के शासकीय स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा लगातार नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इन प्रयोगों को लेकर विभाग पहले भी सवालों के घेरे में रहा है। आरोप है कि योजनाएं अधिकारियों द्वारा बनाई जाती हैं, लेकिन उन्हें बिना तैयारी के शिक्षकों पर थोप दिया जाता है। जब ये प्रयोग असफल होते हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाल दी जाती है, जबकि योजना बनाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती।
इसी कड़ी में शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के निजी मोबाइल में VSK एप डाउनलोड कराने के निर्देश पर शालेय शिक्षक संघ ने कड़ा ऐतराज जताया है। संघ के जिला अध्यक्ष दीपक वेंताल ने इसे शिक्षकों की निजता का सीधा उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी एप को डाउनलोड करने के लिए मोबाइल के डाटा,कैमरा और अन्य निजी जानकारियों की अनुमति देनी पड़ती है। ऐसे में निजी मोबाइल पर जबरन एप डाउनलोड कराना शिक्षकों के व्यक्तिगत संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका को बढ़ाता है।
दीपक वेंताल ने कहा कि AI और डीपफेक के इस दौर में निजी मोबाइल में दबावपूर्वक एप डाउनलोड कराना न केवल शिक्षक बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की और ई-अटेंडेंस से जुड़े इस पायलट प्रोजेक्ट को तुरंत निरस्त करने की अपील की।
शालेय शिक्षक संघ के जिला सचिव नेमीचंद भास्कर ने भी विभाग की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या शिक्षा विभाग को अपने ही अधिकारियों और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है? उन्होंने पूछा कि जब CAC,संकुल प्राचार्य,संस्थाप्रमुख,BRCC,ABEO और BEO जैसे पदों पर जिम्मेदार अधिकारी मौजूद हैं,तो फिर एप के माध्यम से निगरानी की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। क्या विभाग इन पदों पर बैठे अधिकारियों को उनके दायित्वों से विमुख मान रहा है?
संघ के ब्लॉक अध्यक्ष दुर्गेश देवांगन,गुनाराम निर्मलकर और विवेक गोविन्द ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी नेटवर्क की गंभीर समस्या बनी रहती है। कई बार सर्वर डाउन रहता है। ऐसे में मोबाइल नेटवर्क आधारित उपस्थिति प्रणाली न केवल अव्यवहारिक है बल्कि पूरी तरह अनुचित भी है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल शिक्षक की निजी संपत्ति है,जिसमें परिवार के फोटो,बैंक से जुड़ी जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण निजी दस्तावेज होते हैं। ऐसे में दबाव बनाकर किसी एप को डाउनलोड कराना संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के अधिकार का खुला उल्लंघन है। शिक्षा विभाग को ऐसे प्रयोगों से बचना चाहिए और इस पायलट प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
शालेय शिक्षक संघ ने एक स्वर में मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में बिना संवाद और सहमति के किए जा रहे ऐसे प्रयोग बंद हों और शिक्षकों की गरिमा व निजता का सम्मान किया जाए।



