मुंगेली/भारतीय जनता पार्टी का मुंगेली जिला संगठन इन दिनों अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी के दौर से गुजरता नजर आ रहा है। पार्टी के भीतर से ही उठ रही आवाज़ों ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी पर पार्टी समर्थकों और पुराने कार्यकर्ताओं ने मनमानी करने,जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने और अपने चहेते लोगों को ही आगे बढ़ाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी से लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत,निष्ठा और समर्पण के बावजूद उन्हें न तो संगठनात्मक निर्णयों में शामिल किया जा रहा है और न ही कोई जिम्मेदारी दी जा रही है। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
संगठनात्मक निर्णयों में उपेक्षा का आरोप
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिलाध्यक्ष द्वारा लिए जा रहे अधिकांश फैसले बिना किसी सलाह-मशविरा के होते हैं। मंडल से लेकर जिला स्तर तक की नियुक्तियों, कार्यक्रमों और बैठकों में पारदर्शिता की कमी बताई जा रही है। समर्थकों का कहना है कि संगठन की परंपराओं और सामूहिक निर्णय की संस्कृति को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं, जो पार्टी की विचारधारा और अनुशासन के विपरीत हैं।
बैठकों से दूरी,बढ़ती नाराजगी
सूत्रों के अनुसार,हाल के दिनों में पार्टी की कई अहम बैठकों में वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ताओं की गैरमौजूदगी साफ तौर पर देखने को मिली है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लगातार हो रही उपेक्षा और अपमान के चलते उन्होंने बैठकों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्षों तक संगठन के लिए काम करने के बावजूद जब सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलती तो मनोबल टूटना स्वाभाविक है।
विधायक से नजदीकी का मुद्दा चर्चा में
पार्टी के अंदरखाने में यह चर्चा भी तेज है कि जिलाध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी की विधायक पुन्नूलाल मोहले से नजदीकी के कारण उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। समर्थकों का कहना है कि इसी राजनीतिक संरक्षण के चलते जिलाध्यक्ष संगठन को अपने तरीके से चला रहे हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
आगामी चुनावों पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते संगठन के भीतर पनप रहे इस असंतोष को नहीं सुलझाया गया, तो इसका सीधा असर पार्टी की जमीनी पकड़ और आगामी चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं की अनदेखी किसी भी संगठन को भीतर से कमजोर कर देती है,और इसका खामियाजा चुनाव के समय भुगतना पड़ सकता है।
जिलाध्यक्ष की प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया,लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया। वहीं,पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचते नजर आए।
अब देखना यह होगा कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और मुंगेली जिला संगठन में बढ़ते असंतोष को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



