मुंगेली/जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत कुकुसदा में निर्माणाधीन सड़क को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण कर रहा ठेकेदार ग्राम के शासकीय तालाब से अवैध रूप से मुरुम मिट्टी निकाल रहा है और उसी मिट्टी का उपयोग सड़क पिचिंग में किया जा रहा है। शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं, जिससे ग्रामवासियों,पंचों और उपसरपंच में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनिज अधिकारी और लोक निर्माण विभाग (PWD) की चुप्पी से ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। वे न केवल शासकीय संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं,बल्कि अमानक गुणवत्ता वाली सड़क निर्माण सामग्री का उपयोग कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
क्या है मामला?
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार,ग्राम कुकुसदा के आश्रित ग्राम पड़रियाझाप से मेड़पार तक लगभग 1,500 मीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 1 करोड़ 87 लाख रुपए बताई जा रही है। इस सड़क के बेस और किनारों पर मुरुम बिछाने का प्रावधान था,लेकिन ठेकेदार द्वारा मिट्टी मिलाकर अमानक मुरुम का उपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने सड़क किनारे तालाब की खुदाई कर मुरुम मिट्टी निकाली है,जिससे तालाब की गहराई और संरचना को नुकसान पहुँचा है। वहीं सड़क पर डाली जा रही मिट्टी के कारण सड़क की मजबूती पर भी सवाल उठ रहे हैं।
खनिज विभाग की निष्क्रियता पर सवाल
ग्राम के उपसरपंच रामरतन निर्मलकर और पंच गोविंदा जायसवाल ने बताया कि उन्होंने जिला खनिज अधिकारी,मुंगेली को लिखित और हस्ताक्षरयुक्त शिकायत सौंपी थी। बावजूद इसके अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि जिला खनिज अधिकारी ज्योति मिश्रा ने कहा कि “रात में खनन होने पर मैं मौके पर नहीं जा सकती।”ग्रामीणों ने इस जवाब को विभागीय लापरवाही करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में अधिकांश अवैध खनन रात के समय ही होता है और अधिकारी उसी समय निरीक्षण करने से बचते हैं।
उपसरपंच का कहना है कि अधिकारी अगर चाहें तो दिन में भी खनन स्थल का निरीक्षण कर माप कर सकती हैं, लेकिन ऐसा न करने से यह स्पष्ट है कि विभाग जानबूझकर अनदेखी कर रहा है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही
लगभग 1.87 करोड़ की लागत वाली सड़क निर्माण परियोजना में कोई साइनबोर्ड नहीं लगाया गया है,जिससे यह भी स्पष्ट नहीं है कि कार्य किस ठेकेदार द्वारा और किस तिथि तक पूरा होना है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के सोल्डर (किनारे) में तो पूरी तरह मिट्टी ही भरी जा रही है,जो निर्माण गुणवत्ता के मानकों के खिलाफ है।
सामान्य ग्रामीणों ने भी सड़क की खराब गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से कोई निगरानी या सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मनोज जैन,एसडीओ लोक निर्माण विभाग पथरिया ने कहा —
“मेड़पार से पड़रियाझाप तक की सड़क का कार्य बिलासपुर क्षेत्र के अधिकारी के अधीन आता है। मुझे इस निर्माण की जानकारी नहीं है।”
आर. चंद्रा,एसडीएम पथरिया ने बताया —
“ग्रामीणों द्वारा अवैध उत्खनन की शिकायत प्राप्त हुई है। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
ग्रामीणों का चेतावनी भरा ऐलान
ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की,तो वे सड़क निर्माण स्थल पर धरना-प्रदर्शन कर उग्र आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी संपत्ति की लूट और तालाब की बर्बादी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कुकुसदा में सड़क निर्माण को लेकर उभरा यह विवाद स्थानीय प्रशासन, खनिज विभाग और PWD की लापरवाही का प्रतीक बन गया है। एक ओर सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में नियमों की अनदेखी और सरकारी संसाधनों की लूट जारी है। ग्रामीणों की आवाज अगर अनसुनी रही,तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़ा जन आंदोलन बन सकता है।



