मुंगेली/शहर के गौरव पथ निर्माण कार्य को लेकर लगातार विवाद गहराता जा रहा है। करोड़ों रुपयों की लागत से हो रहे सड़क निर्माण की गुणवत्ता,सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठ रही शिकायतों के बावजूद ठेकेदार की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है।
कुछ दिन पहले ही शिवाजी वार्ड के पार्षद,जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और अन्य पार्षदों ने इस कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ठेकेदार अविनाश बिल्डकॉन के खिलाफ मोर्चा खोला था। हाल ही में जिले के कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्थल का निरीक्षण कर जांच की थी।

कट रहे है पेड़,ये विकास नहीं विनाश है
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि गौरव पथ का निर्माण अनावश्यक है,क्योंकि इस सड़क पर पहले से ही पर्याप्त व्यवस्था थी। उनका आरोप है कि इस परियोजना के नाम पर डिवाइडर में लगे बड़े-बड़े पेड़ काटे जा रहे हैं। इन पेड़ों के हटने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा,आम नागरिकों ने कहा ये विकास नहीं विनाश है

नगर पालिका इंजीनियर ने दावा किया था कि निकाले गए सभी पेड़ों को अन्यत्र लगाया जाएगा। लेकिन हकीकत इसके उलट सामने आई है। हाल ही में यह देखा गया कि रेहूटा ग्राम में कई पेड़ फेंक दिए गए,जिनकी उचित देखभाल तक नहीं हो रही है।
जिम्मेदारी टालने का खेल
जब इस मामले में ठेकेदार के सुपरवाइजर से सवाल किया गया,तो उन्होंने साफ कहा कि उनका काम सिर्फ पेड़ निकालकर रखना है, पेड़ लगाना नगर पालिका की जिम्मेदारी है। वहीं,स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ खुले में छोड़ दिए गए हैं और लोग उन्हें काटकर ले जा रहे हैं।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी और इंजीनियर ने भी माना कि ठेकेदार को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि जितने पेड़ निकाले जाएंगे उतने ही वापस लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया है,तो ठेकेदार को नोटिस जारी कर कठोर कार्यवाही की जाएगी।



पर्यावरण प्रेमियों का आक्रोश
पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर फेंका जा रहा है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की,तो वे ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाएंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक पेड़ को बड़ा बनने में वर्षों लगते हैं और इसे काट देना पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचाना है।
प्रदेश सरकार के अभियान पर सवाल
इस घटना ने शासन के “एक पेड़ मां के नाम” जैसे पर्यावरण संरक्षण अभियानों की गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि एक ओर प्रदेश सरकार हरा-भरा वातावरण और वृक्षारोपण की बात करती है,वहीं दूसरी ओर ऐसे निर्माण कार्यों में बड़े पेड़ों को बिना सोचे-समझे काटा जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ठेकेदार पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है।



