संस्थान छत्तीसगढ़ बिलासपुर विभाग की योजनानुसार नवीन प्रवेश शंखनाद हेतु संकुल केंद्र मुंगेली पेंडाराकॉपा में मुंगेली, लोरमी, तखतपुर के समस्त आचार्यों का एक दिवसीय प्रशिक्षण रखा गया जिसमें 140 आचार्य उपस्थित रहे। बिलासपुर विभाग प्रमुख वैभव पाण्डेय द्वारा कहा गया कि हम यह भली-भांती जानते है कि बच्चों का प्रथम विद्यालय घर ही होता है और माता प्रथम गुरू। दूसरा यह की बच्चों को खेल-खेल में ही विषय का ज्ञान कराया जा सकता है, इस बात को ध्यान में रखते हुए सरस्वती शिशु मंदिर की विशिष्ट योजना है। सरस्वती शिशु मंदिर की (7+1) विशिष्टताओं शिशु वाटिका की 12 व्यवस्थाएं जिनमें वस्तु संग्रहालय, आदर्श घर, क्रीडांगन, तरणताल, बगीचा, कार्यशाला, चित्र पुस्तकालय, कलाशाला, रंगमंच, प्रदर्शनीकक्ष और विज्ञान प्रयोगशाला के माध्यम से बच्चों के शारीरिक मानसिक बौद्धिक, प्राणिक और आत्मिक विकास सुनिश्चित किया जाता है. जहाँ विषय को सरल व सहज बनाते हुए गणित व विज्ञान का भी बोध होने लगता है। त्रिस्तरीय संस्थागत प्रशिक्षण से आचार्यों को प्रशिक्षित किया जाता है ताकि उत्कृष्ठ अध्यापन कराया जा सके। अभिभावक संपर्क के माध्यम से भैया/बहिनों के सर्वांगीण विकास की चर्चा प्रत्यक्ष किया जाता है। समस्त सरस्वती शिशु मंदिर में राज्य स्तरीय प्रश्न पत्र से परीक्षा का संचालन होता है। उच्चारण की शुद्धता एवं प्राणायाम की दृष्टि से संस्कृत में संगीतमय प्रार्थना किया जाता है। वैदिक गणित व नैतिक शिक्षा एवं मेधावी छात्र परीक्षा से भैया/बहिनों में तर्क शक्ति, समझ, समाज सेवा, राष्ट्र प्रेम एवं प्रतिभा निखारने का अवसर प्रदान करती है।प्रशिक्षण के उपरांत शोभायात्रा के माध्यम से नव प्रवेश का शंखनाद किया गया, प्रशिक्षण में गेंदराम राजपूत विभाग समन्वयक, पेशीराम साहू जिला समन्वयक मुंगेली, प्रकाश लोढ़ा अध्यक्ष विवेकानंद बाल कल्याण समिति, पं. दीनानाथ उपाध्याय उपाध्यक्ष, व्यवस्थापक मीहालाल शिवनाणी, अभय चोपड़ा सह व्यवस्थापक, मुकेश उपाध्याय समिति सदस्य, कामता प्रसाद साहू प्राचार्य, राम प्रसाद राठौर प्राचार्य लोरमी, विजेन्द्र देवांगन प्राचार्य तखतपुर, प्रधानाचार्य नरेन्द्र श्रीवास्तव, सतीश बघेल, देवेन्द्र पाण्डेय, किरण कश्यप उप प्राचार्य, सुरेन्द्र कुमार यादव प्रधानाचार्य एवं समस्त आचार्य बंधु भगनि उपस्थित रहे।



